आनंद नगर में नगर के ठीक मध्य में एक बहुत ही सुन्दर उद्यान था.उसमे अनेकों प्रकार के फूल पत्तों के पेड़पौधे खूब अच्छे ढंग से लगे थे .उद्यान की देख भाल करने के लिए कई सारे कर्मचारी और माली थे .सही देख रेख के कारण हमेशा हरे भरे ये नगर की खास पहचान बन गए थे.जो भी यहाँ आता इसे देखने एक बार जरुर आना चाहता.
इस पार्क के नजदीक ही बच्चों का स्कूल था नर्सरी से दसवीं क्लास तक की पढ़ाई होती थी. बच्चों को जब भी मौका लगता वे भाग कर यहाँ आ जाते खूब मस्ती करते खेलते कभी कभी कोई बच्चा फूल भी तोड़ लेता तब माली काका डंडा लेकर दौड़ते पर आज तक किसी की पिटाई नहीं हुयी थी सिर्फ डांटने फटकारने के बाद फिर कभी अंदर नहीं आने देने की धमकी दे कर छोड़ देते.पर बच्चे तो बच्चे ही थे कभी कभी शरारत कर ही बैठते थे.
पार्क हमेशा ही लोगों से गुलजार रहता था.तरह तरह के पंछियों का भी आना जाना लगा रहता वहाँ पर सुमन और सुरभि नाम की दो गहरी सहेलियां भी आतीं थीं दोनों के घर भी आस पास ही थे. दोनों के मम्मी पापा भी अच्छे दोस्त थे.ये दोनों तीसरी क्लास में थीं.इन्हें यहाँ पर आना बहुत पसंद था. छुट्टियों के दिन तो शाम में और सर्दियों के दोपहर में उनके पूरे परिवार के लोग यहाँ आकर अपना समय आनंद से बिताते थे.सुमन और सुरभि को सबसे ज्यादा तितलियों को देखने में मजा आता वे तो बस उनके पीछे भागतीं रहतीं.माँ और आंटी के कई बार बुलाने पर भी मुश्किल से आतीं. उन्होंने कुछ तितलियों के नाम भी रख छोड़े थे ,सुनहरी तितली को गोल्डी लाल को लाली इसी तरह किसी को कल्लू किसी को पिंकी अनेक रंगों वाली को बौबी कह कर पुकारा करतीं.
धीरे धीरे तितलियाँ भी उनकी दोस्त बनतीं जा रहीं थीं.सुमन को कभी कभी उन्हें पकड़ने का मन होता
सुरभि ने रोका "नहीं नहीं उन्हें सिर्फ देखना चाहिए छूने से ये मर जातीं हैं" “तुझे कैसे पता?” “मेरी बुआ की लड़की
शैली ने एक बार पकड़ा था,जब हम गर्मियों की छुट्टी में उसके घर गए थे तब,और उसने बुआ के मना करने पर भी पकड़ लिया मगर कुछ देर में ही वो मर गयी थी.”सुरभि ने कहा तो सुमन भी सहम गयी.” तब तो मैं इन्हें कभी नहीं पकडूंगी इतनी सुन्दर तितलियाँ मर जाएँ ये मै नहीं चाहती.”गोल्डी और पिंकी दोनों बहने थीं वे अब अक्सर इन दोनो सहेलियों के कंधे या हाथों पर भी बैठ जातीं कुछ पल के लिए ,तब दोनों को बहुत मजा आता था.पर इन तितलियों की माँ को ये जरा भी नहीं पसंद था वह अपनी बेटियों को इनसे दूर रहने की चेतावनी देती "इन इंसानों से दूर रहने में ही हमारी भलाई है वरना कब जान से हाथ धो बैठो पता भी नहीं चलेगा.”पर ये दोनों तो सुमन और सुरभि को अपना दोस्त समझने लगीं थी सो माँ की बातोंको अनसुनी कर देतीं थी .अब तो इन्हें सुमन,सुरभि दिखाई देतीं नहीं की झट से ये उनके पास चली जातीं,कभी कभी तो ये उनके स्कूल तक चली जाती थीं . .
एक दिन स्कूल का एक बदमाश लड़का जम्बो ने जब इन तितलियों को देखा तो तुरंत उसके शैतान खोपड़ी में उन्हें पकड़ने का ख्याल आ गया.सुमन सुरभि के लाख मना करने पर भी वह उनके पीछे लग गया दोनों सहेलियां को उसके इस हरकत पर रोना आ रहा था वे हर हाल में तितलियों को बचाना चाहती थीं पर जम्बो तो मानने के लिए तैयार ही नहीं था उलटे इन्हें ही धमकाना शुरु कर दिया "अगर ये तितली उड़ गयीं तो तुम्हे पिटने के लिए तैयार रहना होगा.”
अब तक ढेर सारे बच्चे वहाँ पर इक्कठे हो गए थे उनमे से कुनिका ने जाकर प्रिंसिपल सर को बता दिया.फिर उन्होंने आ कर जब देखा और जम्बो को कसकर डांटा"ये क्या हो रहा है जम्बो?तुम्हारी तो मैं अच्छे से खबर लूंगा चलो मेरे साथ . तुम,ओर तुम सब भी अपने अपने क्लास में जाओ,”इस तरह से उन तितलियों की जान बची फिर भी गोल्डी तो घायल हो चुकी थी क्योंकि जम्बो ने लगभग उसे पकड ही लिया था वो तो सुमन ने जम्बो को एक धक्का दिया की उसके हाथ से वह छूट कर नीचे गिर गयी. बाद में सुमन ने सर से पूछ कर उसे पार्क के झरने वाले गुलाब के फूल पर रख आई. गोल्डी तब तक डर से ही अधमरी हो गयी थी वैसे ज्यादा चोट नहीं आया था इसलिए थोड़ी ही देर बाद वो पिंकी के साथ उड़ कर चली गयी. घर जाकर दोनों आपस में बातें करने लगी पिंकी ने कहा "आज तो हम उन दोनों लड़कियों की वजह से बच गए वरना वो बदमाश तो हमे मार ही डालता,हमे माँ की बात माननी चाहिए.” “तुम बिलकुल ठीक बोल रही हो अब से हम सुमन और सुरभि के अलावे किसी भी इंसान के पास नहीं जाएंगे ये दोनों तो हमे बहुत प्यार करतीं हैं हमारी जान भी इन्ही की वजह से बची है.” माँ चुपचाप सुन रही थी उनकी बातें वे भी बोली " अब तुम दोनों समझदार हो गयी हो कौन दोस्त है कौन दुश्मन पहचानने लगी हो इस बात से मैं बहुत खुश हूँ .मेरी बात हमेशा याद रखना इंसानों से दूर ही रहना सुमन सुरभि जैसीं बहुत कम मिलेंगी इसलिए बिना जाने हर किसी के पास मत जाना.” हाँ माँ इनके अलावे हम सब से दूर ही रहेंगे. " दोनों ने माँ से वादा किया. और अगले दिन से पार्क वैसे ही हर दिन की तरह चहकता हुआ खुशियों से गुलजार लग रहा था.
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