वो बूढ़ा सा बाबा वो बूढी सी दादी
झुर्रियों से भरी चेहरे वाली वो नानी
इन्ही से सुनी थी जो मैनें कहानी
तितलियों सोन परियों की कथा वो सुहानी
अभीतक मुझे याद है सारी बातें पुरानी
बहुत खूब सूरत है वो बचपन की यादें
भरी दुपहरिया में छुप छुप के चोरी से जाना
पडोसी के बागों का कच्चे अमरुद और अमिया चुराना
सहेली के संग चटखारे लेले के खाना
पता जब चले माँ को तो पिटाई भी खाना
पकड़ से जो छूटे तो पापा के पीछे छुप जाना
बहुत खूब सूरत है वो बचपन की यादें
वो छुटपन में गुड्डे गुड़ियों की शादी
वो मंडप सजाना साथ मिलके भी गाना
जिद करके सभी का माँ से खाना बनवाना
फिर बरात की खातिर और मंडप में शादी
वो भैया का पंडित बनके मंतर भी पढना
बहुत खूब सूरत है बचपन की यादें
विदाई के लिए खूब हल्ला मचाना
नहीं दूंगी गुडिया मेरी है ये तो
लडाई और कुट्टी तुरंत दोस्ती भी
कहाँ खो गया है लड़कपन हमारा
बहुत खूब सूरत है बचपन की यादें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें