शनिवार, 1 जनवरी 2011

बचपन की यादें

            बहुत खूब सूरत है वो बचपन की यादें 
           वो बूढ़ा सा बाबा वो बूढी सी दादी 
              झुर्रियों से भरी चेहरे वाली वो नानी 
           इन्ही से सुनी थी जो मैनें कहानी 
               तितलियों सोन परियों की कथा वो सुहानी 
          अभीतक मुझे याद है सारी बातें पुरानी 
              बहुत खूब सूरत है वो बचपन की यादें 
           भरी दुपहरिया में छुप छुप के चोरी से जाना 
              पडोसी के बागों का कच्चे अमरुद और अमिया चुराना  
          सहेली के संग चटखारे लेले के खाना 
              पता जब चले माँ को तो पिटाई भी खाना 
         पकड़ से जो छूटे तो पापा के पीछे छुप जाना 
           बहुत खूब सूरत है वो बचपन की यादें 
         वो छुटपन में गुड्डे गुड़ियों की शादी 
            वो मंडप सजाना साथ मिलके भी गाना 
         जिद करके सभी का माँ से  खाना बनवाना
            फिर बरात की खातिर और मंडप में शादी 
          वो भैया का पंडित बनके मंतर भी पढना 
        बहुत खूब सूरत है बचपन की यादें 
            विदाई के लिए खूब हल्ला मचाना 
        नहीं दूंगी गुडिया मेरी है ये तो 
          लडाई और कुट्टी तुरंत दोस्ती भी 
        कहाँ खो गया है लड़कपन हमारा 
         बहुत खूब सूरत है बचपन की यादें                        

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